“सुल्तानपुरी की ड्रग क्वीन–कुसुम की पूरी कहानी”

स्पेशल इन्वेस्टिगेशन रिपोर्ट

परिचय

दिल्ली पुलिस ने हाल ही में राजधानी के सुल्तानपुरी इलाके में सक्रिय ड्रग नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। इस नेटवर्क की सरगना कुसुम उर्फ “ड्रग क्वीन” को पुलिस पिछले दो दशकों से तलाश रही थी। साल 1968, उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर का एक साधारण परिवार। इसी परिवार में जन्मी थी कुसुम। न किताबों से न पढ़ाई-लिखाई से उसका कोई रिश्ता रहा। किस्मत ने बचपन से ही गरीबी और अभाव की परछाई उसके सिर पर डाल दी थी ।

💔 विधवा होने का दर्द और दूसरा रिश्ता

कम उम्र में शादी और फिर पति की मौत । जीवन मानो खत्म हो चुका था । लेकिन समाज की बेड़ियों से लड़ते हुए कुसुम ने मनोज से दूसरा विवाह किया । मनोज बेरोजगार और नशेड़ी था । घर में दो वक्त की रोटी के भी लाले पड़े रहते थे ।

💉 तंगी से तस्करी तक का सफर

साल 2002 – आर्थिक तंगी और मजबूरी ने कुसुम को उस अंधेरे रास्ते पर धकेला, जहाँ से कभी लौटना आसान नहीं होता। उसने स्मैक सप्लायर्स से हाथ मिलाया और नशे के कारोबार में कदम रखा।
एक महिला, जो कल तक दो वक्त की रोटी के लिए जूझ रही थी, अब नशे की रानी बनने की ओर बढ़ रही थी।


🚔 पहली गिरफ्तारी – और अंधेरे में गहराई

2003 NDPS एक्ट के तहत पहली गिरफ्तारी हुई । जमानत पर छूटने के बाद कारोबार और फैलाया । लेकिन जेल से बाहर आते ही उसने ठान लिया – अब पीछे नहीं हटना है ।

🏠 चार दीवारों के भीतर बना साम्राज्य

2005 से 2015 के बीच कुसुम ने अपना जाल इतना फैला लिया कि सुल्तानपुरी का हर गली-कूचा उसके कब्जे में था।

  • चार मकान खरीदकर उन्हें जोड़कर बनाया “ड्रग किला”।
  • ऊँचे गेट, CCTV कैमरे, रस्सियों वाली टोकरी से ड्रग्स की सप्लाई।
  • इलाके के हर पेडलर से उसका सीधा ताल्लुक।

सुल्तानपुरी में लोग उसे “मां” और “मैडम” दोनों नामों से पुकारते थे।

👩‍👦 परिवार बना “कार्टेल” कुसुम ने सुल्तानपुरी में चार घर खरीदकर उन्हें जोड़कर “मिनी-मैनशन” तैयार किया ।

स्मैक के साथ हेरोइन, गांजा और ट्रामाडोल तक कारोबार फैला । रस्सी वाली टोकरी से ड्रग्स नीचे फेंककर और पैसे ऊपर खींचकर लेन-देन किया जाता था। घर के चारों ओर CCTV और लोहे के गेट लगाकर पुलिस की पहुँच मुश्किल बनाई गई।   बेटा अमित – नेटवर्क का मैनेजर, बेटियाँ – बैंक ट्रांजेक्शन और डिलीवरी, भाई डैनी – सप्लायर्स और गैंग से कनेक्शन, पूरा घर अब एक ड्रग फैक्ट्री बन चुका था ।

🔥 पुलिस का शिकंजा

2023 आते-आते सुल्तानपुरी की गलियाँ नशे की गिरफ्त में कराहने लगीं। शिकायतें बढ़ीं तो दिल्ली पुलिस ने कुसुम और उसके कार्टेल पर निगरानी शुरू की।

मार्च 2025 में हुई बड़ी रेड ने सबको हिला दिया।

  • बेटा अमित गिरफ्तार
  • 550 पैकेट हेरोइन, लाखों रुपये कैश बरामद
  • SUV और करोड़ों की संपत्ति जब्त

लोग कहते हैं – उस रात सुल्तानपुरी की गलियों में सन्नाटा छा गया

साम्राज्य का पतन

पुलिस ने 7 संपत्तियाँ सील कर दीं। बैंक खातों में 2 करोड़ से अधिक की संदिग्ध ट्रांजेक्शन पकड़ी गई।
इलाके के लोग, जो कल तक डर के मारे चुप रहते थे, अब राहत की साँस लेने लगे।


🏃‍♀️ फरारी और “मोस्ट वॉन्टेड”

लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई।
कुसुम पुलिस की रेड से पहले ही फरार हो गई। आज वह दिल्ली पुलिस की “Most Wanted” लिस्ट में है।

पुलिस अधिकारी कहते हैं –

“यह महिला सिर्फ तस्कर नहीं, एक संगठित ड्रग सिंडिकेट की मास्टरमाइंड है।”


⚖️ नतीजा

गरीबी से शुरू हुई कहानी आज अपराध और फरारी पर आकर खत्म हुई। कुसुम, जो कभी एक साधारण महिला थी, अब इतिहास में दर्ज हो चुकी है –
दिल्ली की सबसे कुख्यात “ड्रग क्वीन” के नाम से। कभी आर्थिक तंगी के कारण नशे के धंधे में उतरी कुसुम ने 20 सालों तक दिल्ली के सुल्तानपुरी को अपने ड्रग साम्राज्य में बदल दिया। लेकिन मार्च 2025 की पुलिस कार्रवाई ने इस साम्राज्य की जड़ें हिला दीं। अब कुसुम फरार है और पुलिस के शिकंजे से बचने की कोशिश कर रही है।

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