दिल्ली के अस्पतालों में रिश्वतखोरी का खेल: मरीज परेशान, व्यवस्था पर सवाल

नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली के संजय गांधी स्मारक अस्पताल, मंगोलपुरी से चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई है। सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो में आरोप लगाया गया है कि अस्पताल में बिना गार्ड और दलालों को रिश्वत दिये न तो दवाई मिलती है और न ही OPD में डॉक्टर को मरीज दिखाया जा सकता है।

💊 मरीजों की मजबूरी

इलाज कराने पहुँचे मरीजों और उनके परिजनों का कहना है कि

  • “अगर पर्ची बनवानी है तो गार्ड को पैसे देने पड़ते हैं।”
  • “दवा काउंटर से मुफ्त दवा तभी मिलती है जब दलाल को कुछ दे दिया जाए।”
  • “OPD के बाहर गार्ड मरीजों से पैसा लिए बिना अंदर नहीं जाने देते।”

इस वीडियो के सामने आने के बाद स्वास्थ्य सेवाओं की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

🧾 नेम प्लेट तक गायब

स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया है कि अस्पताल में ड्यूटी कर रहे कई गार्ड नेम प्लेट तक नहीं लगाते, जिससे उनकी पहचान छिपी रहती है। इससे शिकायत दर्ज करना और भी मुश्किल हो जाता है।

🚨 प्रशासन की प्रतिक्रिया

हालाँकि अब तक अस्पताल प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। लेकिन मरीजों और नागरिक समाज का कहना है कि “यदि राजधानी दिल्ली के बड़े अस्पतालों में यह स्थिति है, तो छोटे अस्पतालों और डिस्पेंसरी में क्या हाल होगा, इसका अंदाज़ा लगाया जा सकता है।”

❓ कब होगा रिश्वत मुक्त इलाज?

दिल्ली सरकार ने हाल के वर्षों में मोहल्ला क्लिनिक, आयुष्मान आरोग्य मंदिर और बीमा योजनाएँ शुरू कीं, लेकिन अगर जमीनी स्तर पर दलाली और रिश्वतखोरी खत्म नहीं हुई तो आम मरीज को राहत कैसे मिलेगी?

जनता का सवाल साफ है — क्या गरीब मरीज को इलाज के लिए अब भी गार्ड और दलाल की जेब भरनी होगी? क्या दिल्ली के अस्पताल कभी रिश्वत मुक्त हो पाएँगे?

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