दिल्ली की स्वास्थ्य व्यवस्था: उपलब्धियाँ और चुनौतियाँ

(विशेष संवाददाता, नई दिल्ली)

नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली की स्वास्थ्य सेवाएँ इस समय बड़े बदलाव से गुजर रही हैं। पूर्ववर्ती आप सरकार के मोहल्ला क्लिनिक मॉडल की जगह मौजूदा बीजेपी सरकार का आयुष्मान आरोग्य मंदिर (AAM) मॉडल धीरे-धीरे जड़ें जमाता दिख रहा है।

मोहल्ला क्लिनिक बनाम आयुष्मान आरोग्य मंदिर

आम आदमी पार्टी ने मोहल्ला क्लिनिक को दिल्ली की पहचान बनाया था, जहाँ लोगों को नज़दीक ही मुफ्त दवाइयाँ और जाँच मिल जाती थीं। मगर अब बीजेपी सरकार ने 1,100 आयुष्मान आरोग्य मंदिर स्थापित करने का लक्ष्य रखा है, जिनमें से कई काम करना शुरू कर चुके हैं।
मौजूदा समय में कई मोहल्ला क्लिनिक AAM में बदल रहे हैं। लेकिन कर्मचारियों की वेतन और अनुबंध संबंधी समस्याएँ अब भी बनी हुई हैं।

अस्पतालों का विस्तार

दिल्ली सरकार का दावा है कि हाल ही में पाँच अस्पतालों का विस्तार कर 1,300 से अधिक नए बेड जोड़े गए हैं। वहीं सात पुराने अस्पतालों को सुपर स्पेशियलिटी सेंटर के रूप में विकसित किया जा रहा है।
केंद्र सरकार के अधीन AIIMS दिल्ली में भी नया क्रिटिकल केयर ब्लॉक बन रहा है, मगर डॉक्टरों की कमी और स्टाफ की रिक्तियाँ अभी बड़ी चुनौती बनी हुई हैं।

बीमा और वित्तीय सहायता

दिल्ली में आयुष्मान भारत योजना लागू हो चुकी है, जिसके तहत प्रत्येक परिवार को ₹5 लाख का सालाना बीमा कवर मिलेगा। इसके साथ ही दिल्ली सरकार ने अतिरिक्त ₹5 लाख का टॉप-अप देने की घोषणा की है। वहीं दिल्ली आरोग्य कोष (DAK) जैसी योजनाएँ महंगे इलाज के लिए लोगों को राहत दे रही हैं।

जनता की राय

शालीमार बाग़ की रहने वाली सुमन देवी का कहना है,
“मोहल्ला क्लिनिक में आसानी से इलाज मिल जाता था, पर अब कई जगह बंद हो गए हैं। नई योजना कब पूरी तरह लागू होगी, यह देखना होगा।”
वहीं राजेश कुमार, जिनका इलाज निजी अस्पताल में हुआ, कहते हैं,
“सरकार की बीमा योजना से थोड़ी राहत मिलेगी, लेकिन असली चुनौती अस्पतालों में समय पर बेड और डॉक्टर मिलने की है।”

निष्कर्ष

दिल्ली की स्वास्थ्य व्यवस्था का चेहरा बदल रहा है। आप सरकार का मोहल्ला क्लिनिक मॉडल धीरे-धीरे बीजेपी सरकार के AAM मॉडल में बदल रहा है। सफलता इस पर निर्भर करेगी कि—

  1. आयुष्मान आरोग्य मंदिर कितनी तेजी से पूरी तरह चालू होते हैं,
  2. सरकारी अस्पतालों में स्टाफ और बेड की कमी कितनी जल्दी दूर होती है,
  3. बीमा योजनाओं का लाभ आम आदमी तक कितना सुगमता से पहुँचता है।

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